आदिवासी समाज का इतिहास गौरवशाली: मुख्यमंत्री 

सारसमाल में कर्मा पूजा महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री, मांदर लेकर समाज के लोगों के साथ किया कर्मा नृत्य

रायगढ़. तमनार विकासखंड के ग्राम सारसमाल स्थित माध्यमिक शाला के खेल मैदान में गुरुवार को उरांव समाज विकास समिति, छत्तीसगढ़-ओडिशा हिमगिर क्षेत्र द्वारा कर्मा पूजा महोत्सव का आयोजन किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भगवान करम देव तथा आराध्य देव भगवान शिव और माता पार्वती की विधिवत पूजा-अर्चना कर प्रदेशवासियों की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री कर्मा दलों के आग्रह पर मांदर लेकर आदिवासी समाज के लोगों के साथ पारंपरिक कर्मा नृत्य में शामिल हुए। उन्होंने समाज के लोगों के साथ झूमकर नृत्य किया। उनकी सहज सहभागिता ने आयोजन का उत्साह को और बढ़ा दिया। समाज के पदाधिकारियों ने गजमाला पहनाकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि आदिवासी समाज का इतिहास गौरवशाली रहा है। देश की स्वतंत्रता के संघर्ष में भगवान बिरसा मुंडा, वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर और अन्य जनजातीय वीरों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन महापुरुषों के योगदान और आदिवासी समाज की समृद्ध विरासत को नई पीढ़ी तक पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री एवं भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी ने अलग जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन कर जनजातीय समाज के विकास को संस्थागत आधार दिया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भी जनजातीय समुदाय के विकास, सम्मान और बुनियादी सुविधाओं के विस्तार के लिए विभिन्न योजनाएं संचालित की जा रही हैं। नया रायपुर में स्थापित जनजातीय संग्रहालय के माध्यम से समाज के गौरवशाली इतिहास, परंपराओं और वीर महापुरुषों के योगदान को जानने का अवसर मिलेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद राष्ट्रपति पर जनजातीय समाज की बेटी द्रौपदी मुर्मु विराजमान हैं। छत्तीसगढ़ में भी जनजातीय समाज के एक बेटे के रूप में मुख्यमंत्री के पद पर सेवा करने का अवसर मिलना गौरव की बात है। उन्होंने कहा कि जनजातीय समाज को शिक्षा, सामाजिक विकास और आर्थिक उन्नति के अवसरों से जोड़ना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आदिवासी समाज प्रकृति का उपासक है और पर्यावरण संरक्षण उसकी परंपरा का अभिन्न हिस्सा है। कर्मा पर्व जैसे आयोजन समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने के साथ आपसी एकता और सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का अवसर देते हैं। मुख्यमंत्री ने सभी को कर्मा तिहार की बधाई देते हुए प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना की।

शिक्षा और रोजगार के अवसरों का लाभ उठाएं युवा

मुख्यमंत्री ने शिक्षा को जीवन में आगे बढ़ने का प्रमुख आधार बताते हुए युवाओं से लक्ष्य निर्धारित कर प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि आदिवासी विद्यार्थियों को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए प्रयास विद्यालय संचालित किए जा रहे हैं। प्रदेश के विभिन्न स्थानों पर नालंदा परिसर जैसी सुविधाओं के माध्यम से विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर वातावरण उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने राष्ट्रीय स्तर के शैक्षणिक संस्थानों में अध्ययन के अवसरों का लाभ उठाने और दिल्ली में जनजातीय युवाओं के लिए छात्रावास की क्षमता बढ़ाकर 200 सीट किए जाने का भी उल्लेख किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए भर्ती प्रक्रिया, रोजगार मेलों और उद्योगों के माध्यम से अवसर उपलब्ध कराने पर जोर दिया जा रहा है। युवाओं को इन अवसरों का लाभ लेकर अपने परिवार और समाज के विकास में योगदान देना चाहिए। उन्होंने केंद्र एवं राज्य सरकार की जनजातीय कल्याण योजनाओं का उल्लेख करते हुए पात्र हितग्राहियों से उनका लाभ लेने की अपील की। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के माध्यम से जनजातीय क्षेत्रों में आवास, सड़क, पेयजल सहित बुनियादी सुविधाओं के विस्तार की जानकारी भी दी। कार्यक्रम के दौरान क्षेत्र में नर्सिंग कॉलेज की स्थापना की मांग रखी गई। मुख्यमंत्री श्री साय ने इस मांग का परीक्षण कराने और उसके बाद आवश्यक पहल करने का आश्वासन दिया।

शिक्षा, एकता और संस्कृति को आगे बढ़ाने का आह्वान

राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि आदिवासी समाज ने अपनी संस्कृति, परंपराओं और लोककलाओं को आज भी जीवंत रखा है। समाज के वीर महापुरुषों के योगदान को व्यापक पहचान दिलाने की आवश्यकता है। उन्होंने युवाओं से शिक्षा को प्राथमिकता देने और सामाजिक एकता को मजबूत बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज की प्रगति का आधार है और सांस्कृतिक एकता उसकी पहचान को मजबूत करती है। उरांव समाज विकास समिति के अध्यक्ष श्री पनत राम भगत ने स्वागत उद्बोधन में कर्मा पर्व की प्राचीन परंपरा, उरांव समाज की भाषा, संस्कृति, लोककला और प्रकृति से जुड़े गोत्रों की विशेषताओं पर प्रकाश डाला। उन्होंने समाज की सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकजुटता बनाए रखने की आवश्यकता बताई। कर्मा महोत्सव में आदिवासी समाज की समृद्ध लोक संस्कृति और परंपराओं की मनोहारी झलक देखने को मिली। मांदर, मृदंग और ढोल की थाप पर महिला-पुरुषों ने पारंपरिक वेशभूषा में लयबद्ध कर्मा नृत्य प्रस्तुत किया। प्रकृति के प्रति प्रेम, सामूहिकता और आराध्य देवों के प्रति आस्था को अभिव्यक्त करते इस नृत्य ने उपस्थित लोगों को आकर्षित किया। कर्मा पर्व आदिवासी समाज की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण प्रतीक है, जो नई फसल की खुशी और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता की भावना से जुड़ा है।

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