रायगढ़ में मिला दुर्लभ प्रजाति का 'रेड सैंड बोआ' सांप, 10 सालों बाद देखा गया, सर्प रक्षक समिति ने सुरक्षित जंगल में छोड़ा

रायगढ़. छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिला में एक दुर्लभ प्रजाति का सांप 10 सालों बाद देखा गया है जिसे रेड सैंड बोआ के नाम से जाना जाता है। धनगर गांव में इसके होने की जानकारी मिलने के बाद सर्परक्षक समिति व वन अमला की टीम मौके पर पहुंची और इसका रेस्क्यू कर उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ा है। मिली जानकारी के मुताबिक सर्परक्षक समिति के वरिष्ठ रेस्क्यूवर पुष्पेंद्र त्रिपाठी को सूचना मिली कि धनागर गांव में एक व्यक्ति के घर पर दुर्लभ प्रजाति का रेड सैंड बोआ सांप देखा गया है, जिसे कोई अज्ञात व्यक्ति जंगल में छोड़ने का झांसा देकर अपने साथ ले गया है। जिसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए सर्प रक्षक टीम के अध्यक्ष विनितेश तिवारी ने तत्काल समिति के सचिव सुमित बेहरा को सांप को अपनी सुरक्षा में लेने को कहा। इसके तुरंत बाद वन विभाग के परिक्षेत्र अधिकारी संजय लकड़ा को पूरे मामले की जानकारी दी। सर्प रक्षक की टीम मौके पर पहुंची और उस अज्ञात व्यक्ति से सांप को लेकर वापस लौटी। जहां वन मंडल कार्यालय में विभागीय अधिकारियों को सांप के बारे में विस्तृत जानकारी देने के बाद वन अमले के साथ उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ने ले जाया गया। दुर्लभ प्रजाति के सांप का स्वास्थ्य जांच कर, उसे जंगल के सुरक्षित क्षेत्र में प्राकृतिक पुनर्वास के लिए स्वच्छंद छोड़ दिया गया।

अंधविश्वास और अवैध तस्करी की जाती है

इस संबंध में सर्प रक्षक समिति के अध्यक्ष विनितेश तिवारी ने बताया कि यह दुर्लभ प्रजाति का सांप है। रायगढ़ और आसपास के क्षेत्र में पिछले 10 वर्षों में यह सांप पहली बार देखा गया है। समिति ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार के अंधविश्वास अथवा झांसे में न आएं और वन्यजीव दिखने पर तुरंत वन विभाग या सर्प रक्षकों को सूचना दें।

सुरक्षित जंगल में छोड़ गया

रेंजर संजय लकड़ा ने बताया कि दुर्लभ प्रजाति के सांप का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया, वह पूरी तरह से स्वस्थ था, जिसके बाद उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में इसकी कीमत करोड़ों रुपये होने की बात कही जाती है।अंधविश्वास और भ्रामक प्रचार के चलते इसकी अवैध तस्करी की कोशिशें की जाती है।

जानिए 'रेड सैंड बोआ' के बारे में

* वैज्ञानिक नाम (Scientific Name): एरीक्स जॉनी (Eryx johnii) * स्थानीय पहचान: इसे बोलचाल की भाषा में "बिल खोदू सांप" या "दोमुंहा सांप" भी कहा जाता है। इसका पूंछ वाला हिस्सा भी सिर जैसा गोल दिखता है, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है। * किसानों का सच्चा मित्र: यह सांप पूरी तरह विषहीन (Non-venomous) और शांत स्वभाव का होता है। यह जमीन में बिल बनाकर मिट्टी को भुरभुरी और उपजाऊ बनाता है तथा खेतों में फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले चूहों और कीटों को खाकर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखता है।

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