अंधविश्वास और अवैध तस्करी की जाती है
इस संबंध में सर्प रक्षक समिति के अध्यक्ष विनितेश तिवारी ने बताया कि यह दुर्लभ प्रजाति का सांप है। रायगढ़ और आसपास के क्षेत्र में पिछले 10 वर्षों में यह सांप पहली बार देखा गया है। समिति ने आम जनता से अपील की है कि किसी भी प्रकार के अंधविश्वास अथवा झांसे में न आएं और वन्यजीव दिखने पर तुरंत वन विभाग या सर्प रक्षकों को सूचना दें।सुरक्षित जंगल में छोड़ गया
रेंजर संजय लकड़ा ने बताया कि दुर्लभ प्रजाति के सांप का स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया, वह पूरी तरह से स्वस्थ था, जिसके बाद उसे सुरक्षित जंगल में छोड़ा गया है। उन्होंने बताया कि अंतरराष्ट्रीय ब्लैक मार्केट में इसकी कीमत करोड़ों रुपये होने की बात कही जाती है।अंधविश्वास और भ्रामक प्रचार के चलते इसकी अवैध तस्करी की कोशिशें की जाती है।* वैज्ञानिक नाम (Scientific Name): एरीक्स जॉनी (Eryx johnii) * स्थानीय पहचान: इसे बोलचाल की भाषा में "बिल खोदू सांप" या "दोमुंहा सांप" भी कहा जाता है। इसका पूंछ वाला हिस्सा भी सिर जैसा गोल दिखता है, जिससे भ्रम की स्थिति बनती है। * किसानों का सच्चा मित्र: यह सांप पूरी तरह विषहीन (Non-venomous) और शांत स्वभाव का होता है। यह जमीन में बिल बनाकर मिट्टी को भुरभुरी और उपजाऊ बनाता है तथा खेतों में फसलों को नुकसान पहुँचाने वाले चूहों और कीटों को खाकर प्राकृतिक संतुलन बनाए रखता है।जानिए 'रेड सैंड बोआ' के बारे में









