2 नवंबर को सजेगा राज्योत्सव का मंच, दिखेगी ‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’ की झलक

 

जिला पंचायत सीईओ ने समीक्षा बैठक लेकर अधिकारियों को दिए आवश्यक निर्देश

रायगढ़. जिले में 2 नवंबर को आयोजित होने वाले राज्योत्सव की तैयारियों को लेकर जिला पंचायत सीईओ अभिजीत बबन पठारे ने अधिकारियों की बैठक ली। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 02 नवंबर को रायगढ़ के संत पूज्य श्री प्रियदर्शी राम ऑडिटोरियम में जिला स्तरीय राज्योत्सव आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम की मुख्य थीम ’‘सशक्त नारी, युवा उड़ान’’ होगी। इसमें विभिन्न विभागों की विकास प्रदर्शनी के माध्यम से जिले की उपलब्धियों, शासन की महत्वपूर्ण योजनाओं और सफल परियोजनाओं को प्रदर्शित किया जाएगा। स्थानीय कलाकारों द्वारा सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किए जाएंगे।

विभागों को सौंपी गई अलग-अलग जिम्मेदारी

राज्योत्सव की व्यवस्था के लिए संबंधित विभागों को अलग-अलग जिम्मेदारियां सौंपी गई हैं। कार्यक्रम स्थल पर मंच, पंडाल, बिजली, जनरेटर, ध्वनि व्यवस्था, पेयजल, साफ-सफाई, बैठक व्यवस्था और चलित शौचालय की व्यवस्था की जाएगी। अग्निशमन वाहन के साथ चिकित्सा दल, आवश्यक दवाइयां और एंबुलेंस भी उपलब्ध रहेंगी। विभागीय स्टॉलों पर योजनाओं और उपलब्धियों को थीम के अनुरूप प्रदर्शित करने के निर्देश दिए गए हैं। राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर 1 से 3 नवंबर तक शासकीय भवनों में रोशनी की जाएगी। निजी संस्थानों को भी इस अवसर पर अपने भवनों में रोशनी करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। जिला पंचायत सीईओ ने अधिकारियों को सौंपे गए कार्य निर्धारित समय-सीमा में पूरा करने और सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।

भारी बारिश की आशंका के मद्देनजर प्रशासन की रहेगी कड़ी नजर

जिले में 27 से 29 अक्टूबर तक चक्रवात के प्रभाव से भारी बारिश की आशंका के मद्देनजर राहत एवं बचाव कार्य पर प्रशासन की कड़ी नजर रहेगी। जिला पंचायत सीईओ ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को बारिश से बचाव के लिए जरूरी इंतजाम समय पर पूरी करने के निर्देश दिए। उन्होंने संभावित बारिश और बाढ़ को देखते हुए सभी तहसीलदारों को निचले इलाकों का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। इन क्षेत्रों में मकानों, फसलों और पशुओं की स्थिति की जानकारी पहले से जुटाई जाएगी, ताकि जरूरत पड़ने पर प्रभावित लोगों और पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके। गांवों और नगरीय क्षेत्रों में मुनादी कराकर लोगों को सतर्क रहने की जानकारी देने को कहा गया है। जिला और तहसील स्तर के नियंत्रण कक्ष चौबीसों घंटे चालू रखे जाएंगे। संबंधित अधिकारियों को नियंत्रण कक्ष की व्यवस्था सुचारू रखने और किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कार्यवाही के लिए तैयार रहने के निर्देश दिए गए हैं। जिला सेनानी को बचाव दल तैयार रखने को कहा गया है।

बिजली, स्वास्थ्य और पशुओं की सुरक्षा पर जोर

बिजली विभाग को संभावित प्रभावित क्षेत्रों में बड़े पेड़ों और बिजली के खंभों की स्थिति का आकलन करने तथा बिजली आपूर्ति बाधित होने पर जल्द बहाली की तैयारी रखने को कहा गया है। स्वास्थ्य विभाग को उन गर्भवती महिलाओं की सूची तैयार करने के निर्देश दिए गए हैं, जिनका प्रसव जल्द संभावित है। जरूरत पड़ने पर उन्हें पहले से अस्पताल में शिफ्ट किया जाएगा। अस्पतालों में दवाइयां, एंबुलेंस और चिकित्सा दल उपलब्ध रखने को भी कहा गया है। पशुपालन विभाग को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों से पशुओं को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की तैयारी रखने और ऐसे पशुओं की संख्या का आकलन करने के निर्देश दिए गए हैं। नदी-नालों और रपटों पर पानी होने की स्थिति में आवागमन रोकने तथा लोगों को सुरक्षित रखने के लिए संबंधित विभागों को आपसी समन्वय से काम करने को कहा गया है।

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